कभी पशुपालन से प्रतिमाह करीब 50 हजार रुपये की आमदनी करने वाले ग्राम जमूनिया निवासी नन्दराम बघेले ने बैंक से मिले वित्तीय सहयोग को अपने व्यवसाय के विस्तार का आधार बनाया। मेहनत, बेहतर प्रबंधन और बैंक ऋण के सदुपयोग से आज उनकी मासिक आमदनी बढ़कर करीब 4 से 5 लाख रुपये तक पहुंच गई है। अब वे अपने डेयरी व्यवसाय को और विस्तार देने के साथ पशु आहार निर्माण की दिशा में भी आगे बढ़ने की तैयारी कर रहे हैं।

नन्दराम के लिए यह बदलाव एक दिन में नहीं आया। परंपरागत खेती के साथ वे छोटे स्तर पर पशुपालन भी करते थे। इसी दौरान उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक में किसान क्रेडिट कार्ड बनवाया। बैंक से जुड़ने के बाद उन्हें पशुपालन व्यवसाय के विस्तार के लिए उपलब्ध वित्तीय सहायता और योजनाओं की जानकारी मिली। उन्होंने अपने व्यवसाय को बड़े स्तर पर ले जाने का निर्णय लिया और बैंक अधिकारियों से संपर्क कर ऋण के लिए आवेदन किया।

नन्दराम के प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद बैंक द्वारा पशुपालन व्यवसाय के लिए 63 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया। इस वित्तीय सहायता ने उनके छोटे स्तर के पशुपालन व्यवसाय को व्यवस्थित डेयरी संचालन में बदलने का रास्ता खोला। उन्होंने ऋण राशि का उपयोग पशुपालन एवं डेयरी व्यवसाय के विस्तार में किया और धीरे-धीरे व्यवसाय का दायरा बढ़ता गया।

व्यवसाय के विस्तार का असर नन्दराम की आय पर भी दिखाई दिया। पहले जहां उनकी मासिक आमदनी लगभग 50 हजार रुपये थी, वहीं डेयरी व्यवसाय के विस्तार और बेहतर संचालन के बाद यह बढ़कर 4 से 5 लाख रुपये प्रतिमाह तक पहुंच गई। नन्दराम के लिए बैंक ऋण केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने का अवसर साबित हुआ।

अब सफलता के इस पड़ाव पर भी नन्दराम रुकने के बजाय आगे बढ़ने की तैयारी में हैं। वे अपने डेयरी फार्म में 80 अतिरिक्त दुधारू गायें शामिल करने की योजना बना रहे हैं। इसके साथ ही पशु आहार निर्माण की दिशा में भी काम शुरू करने की तैयारी है, ताकि पशुपालन से जुड़ी गतिविधियों को और व्यापक रूप दिया जा सके।

नन्दराम का अनुभव बताता है कि खेती के साथ पशुपालन को व्यवसाय के रूप में अपनाकर किसान अपनी आय के नए स्रोत विकसित कर सकते हैं। उनका कहना है कि बैंक से समय पर मिला ऋण और उसका सही उपयोग व्यवसाय को विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वे क्षेत्र के अन्य किसानों और पशुपालकों को भी शासन एवं बैंकों द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी लेकर उनका लाभ उठाने तथा पशुपालन को आय के सशक्त माध्यम के रूप में अपनाने का संदेश देते हैं।