भोपाल के CSIR-AMPRI परिसर में फ्लाई ऐश आधारित, सीमेंट-रहित जियोपॉलिमर कंक्रीट की प्रदर्शन सड़क बनी है। कम फैलाव वाले मिश्रण को बिछाकर रोलर से दबाया गया। यह हिस्सा 16 अप्रैल 2026 को यातायात के लिए खोला गया।
संस्थान की 17 अप्रैल की सूचना के अनुसार, इस कंक्रीट को पानी से तराई की जरूरत नहीं पड़ी। 21 दिन के भीतर इसकी कंप्रेसिव स्ट्रेंथ 35–40 MPa और फ्लेक्सुरल स्ट्रेंथ 4–4.5 MPa दर्ज की गई। ये इसी प्रदर्शन में बताए गए मजबूती के माप हैं।
AMPRI की निर्माण सामग्री इकाई फ्लाई ऐश, रेड मड और सिरेमिक अवशेष जैसे औद्योगिक कचरे से निर्माण सामग्री पर काम करती है। उसकी सूची में सीमेंट-रहित जियोपॉलिमर के साथ अन्य विशेष निर्माण सामग्री का शोध भी दर्ज है।
इस काम का पुराना क्रम भी मिलता है: 2014 में संस्थान परिसर और 2017 में AIIMS भोपाल में जियोपॉलिमर सड़क के प्रदर्शन हुए थे। 2019 में विदिशा की JMR Enterprises को सड़क में उपयोग की तकनीक हस्तांतरित हुई। 2026 का नया प्रदर्शन रोलर से दबाए गए कंक्रीट का है।
मुख्य बातें
- सीमेंट की जगह फ्लाई ऐश आधारित जियोपॉलिमर।
- बिछाने के बाद पानी से तराई की जरूरत नहीं पड़ी।
- प्रदर्शन सड़क 16 अप्रैल 2026 को खोली गई।
स्रोत और संदर्भ
- पत्र सूचना कार्यालय, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय · From Waste to Wealth: CSIR-AMPRI Builds India’s First Geopolymeric Concrete Road ↗17 अप्रैल 2026
- CSIR-Advanced Materials and Processes Research Institute · Sustainable Construction Materials Division ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।



